भोपाल.
मध्य प्रदेश में साइबर तहसील की व्यवस्था इसी माह से लागू हो जाएगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इसे लागू करने आएंगे और यह कार्यक्रम उज्जैन में हो सकता है। इसके पहले दो बार अमित शाह का कार्यक्रम टल चुका है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री से अनुरोध किया था कि वे इस व्यवस्था को प्रदेशभर में लागू करने के कार्यक्रम में आएं। उल्लेखनीय है कि इस व्यवस्था के क्रियान्वयन से रजिस्ट्री होने के 15 दिन के भीतर क्रेता के पक्ष में नामांतरण हो जाएगा। इसके लिए उसे अलग से कोई आवेदन भी नहीं करना होगा। इसी तरह अविवादित नामांतरण के लिए सभी पक्षों को तहसील कार्यालय आने की जरूरत भी नहीं होगी।
मध्य प्रदेश सरकार ने राजस्व प्रशासन व्यवस्था में सुधार लाने के लिए लाइलाइन व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें व्यक्ति को कार्यालयों के चक्का ही न लगाने पड़ें। इसके लिए प्रदेश के दतिया एवं सीहोर जिले में 27 मई 2022 को साइबर तहसील का पायलट प्रोजेक्ट किया गया था। छह अक्टूबर 2022 को इंदौर, हरदा, डिंडौरी एवं सागर जिले में साइबर तहसील लागू की गई।
10 अगस्त 2023 को इसका विस्तार आगर मालवा, बैतूल, उमरिया, श्योपुर, विदिशा एवं ग्वालियर जिले में किया गया। बाकी जिलों में इसका विस्तार करने का निर्णय कर सरकार अधिसूचना जारी भी कर चुकी है। इसे बड़ा कार्यक्रम करके लागू करने की तैयारी है। इसके लिए मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री से आग्रह किया है।
सूत्रों का कहना है कि फरवरी में ही उज्जैन में बड़ा कार्यक्रम कर साइबर तहसील व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू कर दी जाएगी। इससे अविवादित नामांतरण और बंटवारे के प्रकरणों का निराकरण बिना कार्यकाल का चक्कर लगाए हो जाएगा। रजिस्ट्री के बाद 15 दिन में स्वत: नामांतरण होगा। इसके लिए अलग से आवेदन भी नहीं करना होगा।

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