भोपाल
मध्यप्रदेश सरकार ने नीति आयोग की पहल पर राज्य में कार्यरत लगभग 1 लाख गिग प्लेटफार्म वर्कर्स को मार्च 2024 में असंगठित श्रमिकों की श्रेणी में शामिल किया, साथ ही संबल योजना के समस्त लाभ दिये जाने का निर्णय लिया। संबल पोर्टल पर गिग वर्कर्स पंजीयन का कार्य किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि आज बड़े से लेकर छोटे शहरों तक घर-घर में लोगों की इच्छानुसार सामान पहॅुचाने एवं सेवा देने वाले सेवा क्षेत्र के अमेजन फ्लिपकार्ट, जोमेटो, ब्लिंकिट, ओला, उबर के सर्विस वर्कर्स की संख्या लाखों में है। इन श्रमिकों के हितों के बारे में निर्णय लेने के लिये केन्द्र सरकार ने नीति आयोग को निर्देशित किया था।
संबल पोर्टल पर 700 से अधिक गिग प्लेटफार्म वर्कर्स ने कराया पंजीयन
संबल पोर्टल sambal.mp.gov.in पर अब तक 700 से अधिक गिग वर्कर्स का पंजीयन किया जा चुका है। जैसे-जैसे गिग वर्कर्स में इस क्षेत्र में जागरूकता आ रही है वैसे-वैसे पंजीयन में तेजी आ रही है। संबल योजना में शामिल होने के कारण गिग वर्कर्स को भी संबल अंतर्गत अनुग्रह सहायता एवं अंत्येष्टी का लाभ मिल सकेगा। उल्लेखनीय है कि संबल योजना के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिक को दुर्घटना में मृत्यु की दशा में रूपये 4 लाख सामान्य मृत्यु की दशा में 2 लाख स्थायी अपंगता पर रूपये 2 लाख तथा आंशिक अपंगता पर रूपये 1 लाख आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। अंतिम संस्कार सहायता के रूप मे रूपये 5 हजार दिये जाने का प्रावधान है।
गिग प्लेटफार्म वर्कर्स मेंफूड सप्लाई/वितरण सेवा जैसे जोमेटो, स्वीगी, ईट श्योर फूड पांडा आदि, डिलीवरी बॉय/ऐसोसिएट /डिलेवरी ड्रायवर जैसे अमेजन, फ्लिपकार्ट, बिग बास्केट, जेप्टो, ब्लिंकिट, बेस्ट प्राईज, मेट्रो, डी-मार्ट आदि,टेली कॉलर/कॉल सेंटर एसोसिएट, संदेश वाहक/वितरण (कुरियर सर्विस सेवा), इलेक्ट्रॉनिक/होम एप्लांइस सर्विसकर्ता जैसे अर्बन कम्पनी, हाउस जॉय, रीच यू आदि, केब-टेक्सी ड्रायवर्स जैसे ओला, उबर, जुगनू आदि, माल-वाहक चालक (डोर टू डोर सप्लाई), कस्टमर/कंपलेंट सर्विस आपरेटर, हाउस कीपिंग सर्विस जैसे अर्बन क्लैप, हाउस जॉय, रीच यू आदि, ट्रांक्रिप्शन राईटर/एसोसिएट, फ्रीलांस एप/ऑनलाईन एडुकेटर्स, व्यूटर्स (अनेक नियोजकों हेतु), फ्रीलांस सॉफ्टवेयर डेवलपर/आपरेटर (जो अनेक नियोजकों के लिये काम करते हो), फ्रीलांस ग्राफिक डिजाइनर (अनेक नियोजकों हेतु) और फ्रीलांस ट्रेवल अडेन्डेंट्स गाइड एवं संबंधित श्रमिक शामिल हैं।

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रीवा के राजस्व विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: बिना किसी सरकारी आदेश के बदल दिया गया किसान की जमीन का नक्शा, RTI में हुआ सनसनीखेज खुलासा सिरमौर/रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के तहसील सिरमौर अंतर्गत ग्राम पिपरी में राजस्व अभिलेखों के साथ गंभीर छेड़छाड़ और ‘डिजिटल फर्जीवाड़े’ का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ एक किसान की निजी भूमि का नक्शा बिना किसी आवेदन, बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के कंप्यूटर रिकॉर्ड (पोर्टल) पर बदल दिया गया है। क्या है पूरा मामला? ग्राम पिपरी निवासी आशीष मिश्रा (पिता श्री सम्पत प्रसाद मिश्रा) ने अपनी आराजी क्रमांक 88/1 एवं 88/2 के नक्शे में हुई संदिग्ध तरमीम (संशोधन) को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी थी। महीनों के चक्कर लगवाने और प्रथम अपील के बाद जो जवाब विभाग से मिला, उसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। RTI में विभाग ने खुद स्वीकारी ‘अंधेरगर्दी’: लोक सूचना अधिकारी एवं नायब तहसीलदार वृत्त बैकुण्ठपुर ने अपने लिखित प्रतिवेदन (पत्र क्रमांक 292/2026 दिनांक 06/02/2026) में स्वीकार किया है कि: कंप्यूटर नक्शे में तो तरमीम (बदलाव) दिख रहा है, लेकिन मूल पटवारी नक्शा शीट (Field Map) में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। राजस्व अभिलेखों (खसरा आदि) में इस तरमीम से संबंधित कोई भी प्रविष्टि दर्ज नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग को यह भी नहीं पता कि यह बदलाव किस वर्ष में हुआ और किस अधिकारी के आदेश से किया गया। यानी बिना किसी फाइल और बिना किसी आदेश के रातों-रात कंप्यूटर पर नक्शा बदल दिया गया। पीड़ित का आरोप: “राजस्व अमले की मिलीभगत से हुआ खेल” पीड़ित आशीष मिश्रा का कहना है कि उन्होंने इसके लिए दो बार आवेदन दिए और कई बार अधिकारियों के चक्कर काटे। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी और संबंधित राजस्व कर्मचारियों ने निजी स्वार्थ के चलते अभिलेखों में कूट-रचना (Forgery) की है। पीड़ित ने अब एसडीएम सिरमौर से मांग की है कि इस अवैध तरमीम को तत्काल निरस्त किया जाए और उन दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए जिन्होंने सरकारी पोर्टल के डेटा के साथ छेड़छाड़ की है। अधिकारियों की चुप्पी: बिना आदेश के नक्शा बदलने का यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘डिजिटल सेंधमारी’ को सुधारता है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे उच्च न्यायालय (High Court) की शरण लेंगे। संपर्क हेतु (Contact Info): आशीष मिश्रा (पीड़ित) ग्राम पिपरी, तहसील सिरमौर, रीवा मोबाइल: 8959446240