देहरादून
उत्तर प्रदेश के बाद अब उत्तराखंड में भी कांवड़ यात्रा के रूट पर पड़ने वाली दुकानों और रेड़ियों पर नेम प्लेट लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए ये कदम उठाया गया है और उनके प्रदेश में ये फैसला पहले ही लिया जा चुका था। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि 22 जुलाई से उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा की शुरुआत हो जाएगी। हमने 12 जुलाई को कांवड़ यात्रा को लेकर एक बैठक की थी, जिसमें नेम प्लेट लगाने को लेकर फैसला कर लिया गया था। कुछ लोगों की तरफ से कहा गया था कि जो ठेले या दुकानें लगाते हैं, वह नाम और अपनी पहचान छिपाकर कारोबार करते हैं। इसलिए ये फैसला लिया गया।
सीएम धामी ने कहा कि किसी को परेशान करने या टारगेट के लिए ऐसा नहीं किया जा रहा है बल्कि इस फैसले का मकसद यह है कि सभी की पहचान के बारे में पता हो। हरकी पैड़ी पर कई ऐसी घटनाएं भी सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अपने भाईचारे की वजह से जाना जाता है। हम सभी लोग यहां शांतिपूर्वक रहते हैं। एडीजी लॉ एंड ऑर्डर एपी अंशुमान ने कहा, “कांवड़ियों की ओर से कई बार शिकायतें मिली हैं। इसके कारण विवाद की घटनाएं भी सामने आई हैं। इन विवादों के मद्देनजर ही कानून-व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए उत्तराखंड में प्रशासन द्वारा होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों पर सत्यापन ड्राइव चलाया जा रहा है।
इसलिए उन्हें अपने नाम की प्लेट लगाने का निर्देश दिया गया है, ताकि उनकी पहचान पता चल सके। ऐसा न करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” बता दें कि उत्तराखंड सरकार ने फैसला किया है कि कांवड़ यात्रा के रूट पर पड़ने वाले सभी होटल, रेहड़ी, ठेली वालों को दुकान के आगे अपना नाम लिखना होगा। उत्तरप्रदेश में भी इसे लेकर दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं जिसे लेकर सियासी हंगामा बरपा हुआ है।

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