जयपुर
किसान सम्मान निधि का पैसा अब सिर्फ नाम और खाते के भरोसे नहीं मिलेगा। योजना में फर्जीवाड़े के मामले सामने आने के बाद सरकार ने किसान आइडी को सुरक्षा कवच बनाने का फैसला किया है। वहीं राज्य में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को सहकारिता विभाग से कृषि विभाग में स्थानांतरित करने की तैयारी कर ली गई है। हाल ही में मुख्य सचिव वी श्रीनिवास की अध्यक्षता में हुई बैठक में इसका प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 26वीं किस्त से किसान आईडी को अनिवार्य किया जाएगा।
पहले किसान सम्मान निधि में फर्जीवाड़ा हो चुका है। इसलिए किसान आइडी की अनिवार्यता की जा रही है। मारवाड़ जंक्शन विधानसभा क्षेत्र में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 13 हजार 858 अपात्र व्यक्तियों के आवेदन पंजीकृत हो गए थे। जिन्होंने योजना के तहत विभिन्न किश्तों के माध्यम से 826.66 लाख राशि ले भी ली। बाद में वसूली के आदेश जारी हुए। कृषि स्टैक के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए राजस्थान कृषि विभाग के अधीन समर्पित कृषि स्टैक आयुक्तालय स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया है।
87.44 लाख किसानों का पंजीकरण हो चुका
राज्य में अब तक 87.44 लाख किसानों का किसान रजिस्ट्री में पंजीकरण पूरा हो चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य का 96.95 प्रतिशत है। इनमें 49.46 लाख पीएम-किसान लाभार्थी सफलतापूर्वक किसान रजिस्ट्री से जुड़ चुके हैं।
समय-सीमा 15 सितंबर
कृषि आयुक्त नरेश गोयल का कहना है कि कृषि विभाग की किसान केंद्रित योजनाओं में किसान आइडी को प्राथमिक पहचानकर्ता के रूप में अपनाया जा चुका है। राजस्व मंडल को म्यूटेशन प्रक्रिया में आवेदक का आधार नंबर एवं किसान आइडी अनिवार्य रूप से दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। इसकी समय-सीमा 15 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है।
क्या है किसान सम्मान निधि योजना?
किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) भारत सरकार की एक योजना है। इसके तहत देश के पात्र भूमिधारी किसान परिवारों को हर साल 6,000 की आर्थिक मदद दी जाती है। यह राशि चार-चार महीने के अंतर पर 2,000 की तीन समान किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है। वहीं, राजस्थान में मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना केंद्र सरकार की पीएम-किसान योजना का एक विस्तार है। इसके तहत प्रदेश के पात्र किसानों को सालाना 3,000 रुपए की अतिरिक्त आर्थिक सहायता दी जाती है। ऐसे में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों योजनाओं को मिलाकर किसानों को अब कुल 9,000 रुपए प्रति वर्ष मिलते हैं।

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