नई दिल्ली
सरकार नजफगढ़ ड्रेन के गंदे पानी को ट्रीट करने के लिए कुल 29 डिसेंट्रलाइज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (डीएसटीपी) बनाने की योजना पर काम कर रही है। इनमें से 13 स्थानों पर डीएसटीपी निर्माण के लिए जल बोर्ड ने टेंडर जारी कर दिए हैं, जबकि बाकी 16 स्थानों पर टेंडर प्रक्रिया जारी है। डीएसटीपी के निर्माण पर करीब 3500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है।
- जल बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, नजफगढ़ ड्रेन की कुल लंबाई करीब 57 किलोमीटर है
- अधिकारियों का कहना है कि यमुना में पहुंचने वाली गंदगी का आधा हिस्सा नजफगढ़ ड्रेन से आता है
- यदि ड्रेन के पानी को पूरी तरह ट्रीट कर यमुना में छोड़ा जाए तो काफी हद तक यमुना को साफ किया जा सकता है।
- 13 डीएसटीपी के निर्माण के लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं
- इन 13 स्थानों पर डीएसटीपी निर्माण के लिए 1043.36 करोड़ रुपये का बजट तैयार किया गया है। इसके अलावा, 16 अन्य जगहों पर भी डीएसटीपी निर्माण की योजना है, जिस पर करीब 2476 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है
- स्टडी में सामने आया था, यमुना में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण नजफगढ़ ड्रेन
- कुल 29 डीएसटीपी बनाने की योजना पर काम कर रही है सरकार
डीएसटीपी बनने से क्या होगा फायदा?
अधिकारियों के मुताबिक, डिसेंट्रलाइज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (डीएसटीपी) बनने के बाद नालों का गंदा पानी स्थानीय स्तर पर ही साफ किया जाएगा। इससे बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज सीधे नजफगढ़ ड्रेन और यमुना में जाने से रोका जा सकेगा। इससे न सिर्फ यमुना के प्रदूषण में कमी आने की उम्मीद है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में बदबू और गंदगी की समस्या भी कम होगी। साथ ही, ट्रीट किए गए पानी का उपयोग बागवानी, सफाई और अन्य गैर-पीने योग्य कार्यों में भी किया जा सकेगा, जिससे पानी के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी।

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