प्रायगराज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में स्पष्ट किया कि यदि पत्नी उच्च शिक्षित है, अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से पर्याप्त आय अर्जित करने में सक्षम है तो वह भरण-पोषण की हकदार नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने डॉ. गरिमा दुबे की ओर से दायर एक अपील को खारिज करते हुए दिया।
प्रयागराज की डॉ. गरिमा दुबे स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं और उनके पति न्यूरोसर्जन हैं। उन्होंने ट्रायल कोर्ट में बच्चों और स्वयं के लिए भरण-पोषण की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। ट्रायल कोर्ट ने उनके स्वयं के भरण-पोषण आवेदन को खारिज कर दिया गया था। हालांकि, उनके तीन बच्चों के लिए 60 हजार रुपये प्रति माह का भरण-पोषण स्वीकार किया था। स्वयं के भरण-पोषण की मांग करते हुए डॉक्टर ने हाईकोर्ट में अपील दायर की।
याची अधिवक्ता ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को अस्पताल से निकाल दिया गया है। वह वर्तमान में कार्यरत नहीं हैं। वह उसी जीवन स्तर की हकदार हैं जो अलगाव से पहले था। वहीं, पति के वकील ने दलील दी कि वह एक विशेषज्ञ चिकित्सक हैं जो उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में पति से भी अधिक कमाने की क्षमता रखती हैं। ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, वह सालाना 31 लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रही थीं।

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