नई दिल्ली
सोचिए जरा कि आप ऐसी दुनिया में हैं, जहां टेक्नोलॉजी आपके बोलने से पहले आपकी पसंद जान ले, आपका काम कर दें या आपकी सेहत का हाल बता दे. ये आने वाला फ्यूचर नहीं है बल्कि आज के दौर की हकीकत है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) धीरे-धीरे हमारे जीवन में अपनी जगह बना रही है. पर सवाल ये है कि बच्चों पर इसका क्या असर होगा या वे इसे कैसे हैंडल करेंगे? ऐसे में स्कूल युवा AI फॉर ऑल’ जैसी पहल के जरिए बच्चों को डिजिटल दुनिया में समझदारी से आगे बढ़ने के लिए तैयार किया जा रहा है, ताकि वे भविष्य की टेक्नोलॉजी को सिर्फ अपनाएं नहीं, बल्कि उसे आकार भी दे सकें।
इसका साफ मतलब ये है कि बच्चों को केवल कोडिंग सिखना जरूरी नहीं है बल्कि उन्हें यह समझाना है कि मशीनें किस तरह काम करती हैं।
हर किसी को मिलेगा मौका
ऐसे में AI एजुकेशन की दिशा में भारत सरकार ने नया कदम उठाया है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय ने इस दिशा में युवा AI फॉर ऑल का एक कोर्स शुरू किया है, जो बच्चों में इसके बेसिक कॉन्सेप्ट पर आधारित है. इन प्रोजेक्ट्स में छोटे‑छोटे प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स और इंटरैक्टिव सेशंस शामिल हैं, जिससे बच्चे सिर्फ थ्योरी तक सीमित न रहकर AI का व्यावहारिक नॉलेज भी हासिल कर सकते हैं।
इसके जरिए बच्चे न केवल गैजेट्स चलाना सीखेंगे, बल्कि AI के मूल सिद्धांत, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिसिस और डिजिटल सुरक्षा जैसी अहम स्किल्स पर भी फोकस करेंगे।
स्कूलों में क्यों जरूरी है AI की पढ़ाई?
बड़े-बड़े कंपनियों में AI का यूज तेजी से बढ़ा है. इसे न सीखना सबसे बड़ा रिस्क है. जब वो इनके बारे में नहीं जानेंगे तो, इंटरनेट पर वायरल हो रहे हर अफवाहों पर भरोसा कर लेंगे. एआई की बुनियादी समझ बच्चों में क्रिटिकल थिंकिंग को जन्म देती है।

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