नईदिल्ली
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच हाल के युद्ध ने पूरी दुनिया की निगाहें अपनी ओर खींच रखी हैं. हर कोई सोच रहा है कि आगे क्या होगा. लोग डर और चिंता में हैं क्योंकि किसी भी समय हालात बिगड़ सकते हैं. ऐसे में कुछ लोग इसे नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों से जोड़ रहे हैं, जिन्होंने आने वाले समय में बड़े युद्ध और दुनिया में उथल-पुथल होने की बात कही थी. यही वजह है कि 2026 में नास्त्रेदमस जैसी पुरानी भविष्यवाणियां फिर सुर्खियों में आ गई हैं. लोग यह भी सोच रहे हैं कि इस बड़े तनाव का असर सोने और चांदी की कीमतों पर क्या होगा. क्या यह शेयर बाजार में कोई बड़ी गिरावट का संकेत है।
क्या कहती है नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी?
नास्त्रेदमस ने अपनी भविष्यवाणी में सीधे सीधे कभी सोना, चांदी या 2026 में मंहगाई का जिक्र नहीं किया था. लेकिन, उनकी लिखी बातें अक्सर युद्ध, आर्थिक उथल-पुथल और दुनिया में अस्थिरता की चेतावनी के रूप में देखी जाती हैं. आज लोग इन्हें हाल के युद्ध और संकट से जोड़कर देख हैं. युद्ध के समय लोग सोना और चांदी जैसी संपत्ति की तरफ जाते हैं. इसका मतलब है कि मांग बढ़ने पर कीमतें ऊपर जा सकती हैं. लेकिन, बाजार में हमेशा ऐसा नहीं होता है क्योंकि कीमतों में हमेशा उतार चढ़ाव बना रहता है।
सोना‑चांदी के रेट ऊपर जाएंगे या नीचे?
हाल ही के मार्केट ट्रेंड्स बताते हैं कि स्थिति थोड़ी उलझी हुई है. युद्ध और तनाव होने के बावजूद सोना और चांदी की कीमतें कभी-कभी नीचे जा रही हैं. इसका मुख्य कारण है अमेरिका में डॉलर का मजबूत होना और ब्याज दरों का बढ़ना. असल में इसका मतलब यह है कि सिर्फ दुनिया में युद्ध का होना ही कीमतें बढ़ाने के लिए काफी नहीं. बाजार में और भी कई चीजें असर डालती हैं जैसे कि पैसे की कीमत (डॉलर) और बैंक की नीतियां. यानी, नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी चाहे जैसी भी हो, असली मार्केट की चाल तो इन असली आर्थिक कारणों से तय होती है।
क्या हो सकता है तीसरे विश्व?
आजकल लोग ये बात खूब कर रहे हैं कि क्या मौजूदा हालात आगे चलकर तीसरे विश्व युद्ध में बदल सकते हैं. इसकी वजह ये है कि नास्त्रेदमस ने अपनी लिखी बातों में बड़े युद्ध का जिक्र किया था, जिसे लोग आज के हालात से जोड़ रहे हैं. लेकिन सच यह है कि उनकी बातों में कहीं भी साफ-साफ आज के किसी तीसरे विश्व युद्ध का जिक्र नहीं मिलता है।
एक्सपर्ट क्या कहते हैं और नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी क्या कहती है?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोना, चांदी और शेयर बाजार का हाल महंगाई, ब्याज दर और दुनिया भर की सप्लाई जैसी चीजों पर निर्भर करता है. यानी बाजार असली आर्थिक हालात से चलता है, न कि किसी भविष्यवाणी से. वहीं, नास्त्रेदमस की लिखी बातें सीधी नहीं होतीं हैं, बल्कि इशारों में होती हैं. लोग उन्हें अपने हिसाब से समझ लेते हैं, इसलिए एक ही बात के अलग-अलग मतलब निकाले जाते हैं।
नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां लोगों के बीच चर्चा और डर को जरूर बढ़ा देती हैं, लेकिन असली मार्केट ऊपर-नीचे होने के पीछे वजह अर्थव्यवस्था और दुनिया के हालात होते हैं. इसलिए, निवेश करते समय अंदाजों या भविष्यवाणी पर नहीं, बल्कि सही डेटा और एक्सपर्ट की सलाह पर भरोसा करना ज्यादा समझदारी है।

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