फतेहपुर
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के पत्योरा गांव में निषाद बिरादरी में जन्मी साध्वी निरंजन ज्योति ने एक कथा वाचक के रूप में अपनी यात्रा प्रारंभ की। एक बार विधायक, दो बार सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री, निरंजनी अखाड़े में महामंडलेश्वर का सफर तय करने के बाद बुधवार को वह राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग की अध्यक्ष बन गयीं।
उनकी इस सफलता पर समर्थकों में खुशी और जश्न का माहौल है। हालांकि वह इस समय दिल्ली में हैं लेकिन जैसे ही लोगों को इस कामयाबी की जानकारी हुई लोग से उछल पड़े। तांबेश्वर नगर स्थिति आवास पर समर्थकों का आना-आना प्रारंभ हो गया, यहां से लोग उनके मूसानगर आश्रम भी जा रहे हैं।
बता दें कि 1 मार्च 1967 में उनका जन्म निषाद परिवार में हुआ था। यूं तो उनका जीवन कठिन संघर्षों से गुजरा है। लेकिन 1990 के दशक में वह राममंदिर आंदोलन में जुड़ी और एक प्रखर वक्ता के रूप में पहचान बनीं। वह संतश्री परमानंद जी महराज के आश्रम में उनकी शिष्या के रूप में रहीं और 2012 में पहली बार हमीरपुर सदर सीट से विधायक बनीं।
सोशल मीडिया पर जताया आभार
नवनियुक्त अध्यक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तस्वीरें साझा करते हुए एक श्लोक के साथ अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने लिखा कि पिछड़े समाज के सम्मान, अधिकारों की रक्षा और उनके विकास के लिए वह पूरी प्रतिबद्धता से काम करेंगी।
पिछड़े वर्ग के उत्थान पर जोर
उन्होंने कहा कि आयोग का उद्देश्य पिछड़े वर्ग को न्याय, सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर दिलाना है। इसी दिशा में कार्य करने का संकल्प दोहराया।
केंद्र सरकार में निभा चुकी हैं अहम भूमिकाएं
साध्वी निरंजन ज्योति नरेंद्र मोदी सरकार के पहले और दूसरे कार्यकाल में मंत्री रह चुकी हैं।
2014 में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री बनीं
2019 में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाली
2021 में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में राज्य मंत्री रहीं
राजनीतिक सफर और पृष्ठभूमि
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में जन्मीं साध्वी निरंजन ज्योति निषाद मल्लाह समाज से आती हैं। वे फतेहपुर से सांसद रह चुकी हैं और 2012 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीति में अपनी पहचान बनाई।
वर्ष 2014 व 2019 में फतेहपुर लोकसभा से सांसद बनीं और केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में देशभर में काम किया। अब उन्हें राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग अध्यक्ष के पद की जिम्मेदारी मिली है। दैनिक जागरण से बाचचीत में राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि उनका जीवन समाज के अंतिम पायदान में खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए समर्पित रहा है। हमारे नेतृत्व ने जो अहम जिम्मेदारी दी है उसका निर्वहन पूरी निष्ठा व समर्पण भाव से किया जाएगा।

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