प्रयागराज
पशुपालन विभाग नए कलेवर में आ रहा है। विभाग ने नेशनल डिजिटल लाइव स्टाक मिशन (एनडीएलएम) पोर्टल पर पशुओं व उनके पालकों का विवरण अपलोड करने की योजना शुरू की है। पशुओं को 12 अंकों का यूनिक आधार (पशु आधार) दिया जाएगा। डिजिटल रिकार्ड में पशुपालक का विवरण, टीकाकरण, नस्ल सुधार और बीमारी की स्थिति दर्ज होगी।
मवेशियों के नस्ल लेकर पशु का स्वास्थ्य रिकार्ड होगा
इस डाटा फीडिंग की नियमित निगरानी की जाएगी। इसका उद्देश्य पशुओं का डिजिटल डेटा बेस तैयार करना है। इस पोर्टल पर पशुधन की संख्या, पशुपालकों का आधार, मोबाइल नंबर व जन्म-मृत्यु का ब्योरा मिलेगा। मवेशियों के नस्ल लेकर पशु का स्वास्थ्य रिकार्ड, टीकाकरण की तारीख, उम्र और इलाज का इतिहास अब आनलाइन होगा।
खास-खास
– 12 अंकों का पशु आधार बनेगा, मवेशियों व उनके पालकों का भी बनेगा डेटा बेस
– 14 लाख के करीब जनपद में दुधारू पशु, जिनमें गाय-भैंस, बकरी व भेड़ अधिक
पूरा ब्योरा एनडीएलएम पोर्टल पर अपलोड होगा
पशु की सेहत कैसी है, वह बीमार तो नहीं। कब उसका गर्भाधान कराया गया और कब कौन टीका लगा। एक-एक पशु का यह पूरा ब्योरा एनडीएलएम पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इससे बीमारी की पहचान जल्दी होती है और समय पर उपचार संभव होगा। शासन के फरमान पर विभाग ने कवायद तेज कर दी है। विभाग के कामकाज को धीरे-धीरे डिजिटाइज्ड किया जा रहा है।
पशुधन प्रबंधन, स्वास्थ्य व उत्पादकता में सुधार को प्रयास
सरकारी स्थायी व अस्थायी गोशालाओं में संरक्षित गोवंशों पर हो रहे खर्च से लेकर भुगतान तक की आनलाइन निगरानी की व्यवस्था पहले से ही है। हर पशु की एक-एक जानकारी को विभागीय पोर्टल में समेटने की तैयारी है। पशुधन प्रबंधन, स्वास्थ्य और उत्पादकता में सुधार को यह प्रयास हो रहा है।
पशुओं का स्वास्थ्य रिकार्ड आसानी से उपलब्ध होगा
पशुओं का तैयार होने वाला पशु आधार स्वास्थ्य रिकार्ड, टीकाकरण इतिहास, प्रजनन डिटेल और प्रोडक्शन मेट्रिक्स को साथ जोड़ेगा। इससे पशुओं की पहचान, बीमारियों का प्रबंधन और स्वास्थ्य रिकार्ड आसानी से उपलब्ध होगा।
क्या कहते हैं सीवीओ?
सीवीओ डाॅ. शिवनाथ यादव का कहना है कि इसके लिए जनपद की कमेटी गठित कर ली गई है, जिसमें डीएम मनीष कुमार वर्मा अध्यक्ष, सीडीओ हर्षिका सिंह सचिव व सीवीओ सदस्य सचिव हैं। ब्लाक स्तर पर एसडीएम, बीडीओ, पशु चिकित्सक की कमेटी बनाई गई है। वहीं क्लस्टर और ग्राम पंचायत स्तर पर इसी माह कमेटी गठित होगी। ग्राम पंचायतों में पशुधन प्रसार अधिकारी और दुग्ध समितियों के पदाधिकारी शामिल किए जाएंगे।

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