जबलपुर/बरगी नगर
बरगी बांध से रीवा की ओर जाने वाली दाईं तट मुख्य नहर रविवार दोपहर करीब 12 बजे सगड़ा-झपनी ग्राम पंचायत के पास अचानक फूट गई। नहर फूटते ही हजारों क्यूसेक पानी तेज रफ्तार से बाहर निकलते हुए खेतों से लेकर आसपास की बस्तियों और निचले इलाकों की ओर बढ़ने लगा। देखते ही देखते क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात बन गए, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई।
नहर में लंबे समय से पानी का दबाव अधिक बना हुआ था। नहर की दीवार कमजोर होने से ध्वस्त हो गई। पानी का बहाव इतना तेज था कि कुछ ही देर में खेत जलमग्न हो गए और छह गांवों में जगह-जगह पानी भर गया। गनीमत रही कि नहर का पानी घरों में प्रवेश नहीं कर पाया।
जिन गांवों तक नहर का पानी पहुंचा, वहां के लोगों का आरोप है कि नहर की दीवारें लंबे समय से जर्जर थीं। जहां नहर फूटी है वहां एक साल से पानी का रिसाव हो रहा था। सिंचाई विभाग को शिकायत दी गई थी, लेकिन मरम्मत नहीं की गई। अधिकारियों की अनदेखी व लापरवाही का खामियाजा नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
किसान नीरज उपाध्याय ने बताया कि नहर से पानी के रिसाव की शिकायत ग्रामीणों ने की थी, अधिकारी मौके पर पहुंचे थे, परंतु सुनवाई नहीं हुई। किसान अजय पटेल ने बताया कि यह हादसा अचानक नहीं हुआ, बल्कि विभागीय लापरवाही का नतीजा है। गनीमत रही कि, केनाल के पास ही नरई नाला है, नाला नहीं होता, तो खेत ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों के घरों में पानी घुस जाता। विभाग द्वारा नहर की मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति की गई, जिसका नतीजा सामने है।
तत्काल कराई मुनादी
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल मुनादी कराई, ताकि ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर रहें। क्षतिग्रस्त नहर से सगड़ाझपनी, बम्हनोदा, रोसरा, चारघाट, पिपरियाकला और घाना गांव प्रभावित हुए। नहर का अधिकतम बहाव नरई नाला की ओर गया और इसके आगे का पानी नर्मदा नदी में प्रवाहित हुआ।
चारघाट क्षेत्र का रिपटा जलमग्न हो गया है। निरीक्षण के दौरान पता चला है कि प्रभावित गांवों में गेहूं, चना और सब्जियों की फसल जलमग्न हुई है। जिला प्रशासन के मुताबिक स्थिति नियंत्रण में है।
फसलों के नुकसान का सर्वे शुरू
कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देशन पर एसडीएम जबलपुर अभिषेक सिंह और बरगी बांध दाईं तट नहर के कार्यपालन यंत्री, सिंचाई विभाग के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। जिसके बाद नहर का पानी की निकासी पूरी तरह रोकते हुए टूटे हिस्से के आगे के सभी गेट खोल दिए गए, जिसके बाद हालात सामान्य हो पाए।
वहीं खेतों में पानी भरने से फसलों को हुए नुकसान का सर्वे प्रारंभ कर दिया गया। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों को शासन की ओर से राहत राशि दी जाएगी।
बाईं तट नहर से भी हो रहा रिसाव
बरगी बांध से निकली बाईं तट नहर में भी रिसाव हो रहा है। विभाग का कहना है कि इस एक्वाडक्ट में रिसाव को सुधारने के लिए जल्द शासन स्तर पर प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा।
बरगी बांध में भी सीपेज
बरगी बांध के ब्लाक नंबर 3/10 में सीपेज हो रहा है। भोपाल और दिल्ली से विशेषज्ञों की टीम जांच कर चुकी है। पानी का रिसाव सामान्य स्तर से अधिक पाया गया, लेकिन टेंडर और काम देने की प्रक्रिया में ही मामला उलझा है।
2021 में भी हुई थी घटना
इधर, 2021 में पाटन और मझौली ब्लाक में बरगी बांध की नहरें फूटी थी। पाटन के पास जिनवाणी कलां में नहर फूटने से लगभग ढाई सौ एकड़ में धान की फसल को नुकसान हुआ था। वहीं चरगंवा में नहर फूटने से कोहा नाले में पानी भर गया था।

More Stories
कुटीर और ग्रामोद्योग को नए आयाम देने की तैयारी में मध्यप्रदेश हथकरघा, खादी, रेशम और महिला रोजगार पर विशेष फोकस
भोपाल में पूर्व जज और उनके वकील बेटे पर दहेज हत्या का केस, 18 घंटे में मिली अग्रिम जमानत
जल गंगा संवर्धन अभियान में व्यापक रूप से हो रहे हैं जल-संरक्षण और जल-संवर्धन के कार्य : जल संसाधन मंत्री सिलावट