नई दिल्ली
देश की सबसे अहम मेडिकल परीक्षा NEET-PG 2025 को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला सामने आया है. केंद्र सरकार और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने तीसरे राउंड की काउंसलिंग के लिए कट-ऑफ में भारी कटौती कर दी है. इस फैसले के बाद अब ऐसे उम्मीदवार भी पोस्ट ग्रेजुएशन यानी PG मेडिकल सीटों के लिए पात्र हो गए हैं, जिनके अंक बेहद कम हैं.
कुछ वर्गों में तो नेगेटिव मार्क्स वाले उम्मीदवारों को भी काउंसलिंग में शामिल होने की अनुमति मिल गई है.
यह फैसला मेडिकल शिक्षा व्यवस्था में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. जहां एक तरफ सरकार इसे खाली पड़ी सीटों को भरने की कोशिश बता रही है, वहीं दूसरी ओर डॉक्टरों और मेडिकल संगठनों में इसे लेकर चिंता भी बढ़ गई है.
पहले क्या था नियम?
13 जनवरी 2026 से पहले तक NEET-PG 2025 में क्वालिफाई करने के लिए न्यूनतम कट-ऑफ तय था. जनरल और EWS वर्ग के लिए 50वां परसेंटाइल जरूरी था, जो 800 में से करीब 276 अंक बनता था. PwBD (जनरल) के लिए 45वां परसेंटाइल यानी करीब 255 अंक तय थे.
SC, ST और OBC वर्ग के लिए 40वां परसेंटाइल रखा गया था, जो लगभग 235 अंक थे.
मतलब साफ था कि PG में दाखिले की दौड़ में बने रहने के लिए कम से कम 235 अंक लाने ही पड़ते थे, चाहे उम्मीदवार किसी भी वर्ग का हो.
अब क्या बदल गया?
NBEMS की ओर से जारी नए नोटिस के बाद कट-ऑफ को काफी नीचे कर दिया गया है.
अब जनरल और EWS वर्ग के लिए कट-ऑफ 7वां परसेंटाइल कर दिया गया है, जो करीब 103 अंक बनता है.
PwBD (जनरल) के लिए यह 5वां परसेंटाइल यानी करीब 90 अंक कर दिया गया है. वहीं SC, ST और OBC वर्ग के लिए कट-ऑफ को शून्य परसेंटाइल तक घटा दिया गया है, यानी माइनस 40 अंक तक भी मान्य माने जाएंगे. हालांकि यह साफ किया गया है कि यह बदलाव केवल काउंसलिंग में भाग लेने की पात्रता के लिए है. NEET-PG 2025 की रैंक में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?
सरकार और NBEMS का कहना है कि NEET-PG 2025 के पहले और दूसरे राउंड के बाद भी देशभर में हजारों PG मेडिकल सीटें खाली रह गई थीं. तीसरे राउंड तक पहुंचने के बाद भी कई कॉलेजों में छात्र नहीं मिले.
एक तरफ देश में डॉक्टरों की कमी को लेकर लगातार चर्चा हो रही है, दूसरी तरफ मेडिकल कॉलेजों की ट्रेनिंग सीटें खाली पड़ी हैं. इसी विरोधाभास को खत्म करने के लिए कट-ऑफ घटाने का फैसला लिया गया, ताकि ज्यादा से ज्यादा उम्मीदवार काउंसलिंग में शामिल हो सकें और सीटें भरी जा सकें.
सीटें खाली क्यों रह गईं?
मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे कई वजहें हैं. कई प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में PG की फीस बहुत ज्यादा है, जिसे सामान्य और मध्यम वर्ग के परिवार वहन नहीं कर पाते. कुछ राज्यों में PG पूरी करने के बाद लंबे समय तक सरकारी बॉन्ड की शर्त होती है, जिसमें कठिन इलाकों में पोस्टिंग अनिवार्य होती है. सर्जरी, एनेस्थीसिया और कुछ अन्य ब्रांचों में काम का दबाव बहुत ज्यादा है और कानूनी जोखिम भी रहता है, इसलिए छात्र इन शाखाओं से दूरी बना रहे हैं.
इसके अलावा ट्रेनिंग के दौरान जूनियर डॉक्टरों की काम की स्थिति, लंबे घंटे और सुरक्षा की कमी भी एक बड़ी समस्या है. इन सभी कारणों से कई सीटें खाली रह गईं और सरकार को कट-ऑफ घटाने जैसा बड़ा कदम उठाना पड़ा.
इस फैसले का असर क्या होगा?
इस फैसले के बाद मेडिकल जगत में बहस तेज हो गई है. कई डॉक्टर संगठनों का कहना है कि PG में दाखिला लेने वाले छात्र ही आगे चलकर सर्जन, फिजिशियन, गायनेकोलॉजिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट बनते हैं. अगर प्रवेश का स्तर बहुत नीचे चला गया, तो भविष्य में इलाज की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है.
वहीं सरकार का तर्क है कि सभी उम्मीदवार पहले से MBBS पास हैं. रैंकिंग प्रणाली में कोई बदलाव नहीं किया गया है. कट-ऑफ घटाने का मकसद सिर्फ इतना है कि खाली पड़ी सीटों पर पढ़ाई शुरू हो सके और देश में डॉक्टरों की कमी को कुछ हद तक पूरा किया जा सके.
NEET-PG क्यों है इतनी अहम परीक्षा?
NEET-PG भारत की सबसे बड़ी और सबसे जरूरी मेडिकल परीक्षाओं में से एक है. MBBS करने के बाद डॉक्टर इसी परीक्षा के जरिए पोस्ट ग्रेजुएशन में दाखिला लेते हैं.
NEET-PG पास करने के बाद ही डॉक्टर MD, MS जैसे कोर्स कर पाते हैं और आगे चलकर सुपर स्पेशलिटी की तैयारी करते हैं.

More Stories
बिहार के 211 डिग्री कॉलेजों में 2451 सहायक प्राध्यापकों का चयन, 1980 बिहारी अभ्यर्थी
यूपी के 6 जिलों में अग्निवीर भर्ती रैली, 17 अगस्त से शुरू होगी प्रक्रिया, अप्रैल 2027 तक चलेगी
UGC NET Answer Key 2026: खत्म हुआ इंतजार! NTA इसी हफ्ते जारी कर सकता है प्रोविजनल आंसर की