भोपाल
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के समक्ष उनके लोकसभा क्षेत्र विदिशा के किसानों ने अमानक बीज का मुद्दा उठाया था। स्थिति जानने के लिए कृषि मंत्री स्वयं किसानों के साथ खेतों पर पहुंचे तो बीजों की गुणवत्ता घटिया पाई। इससे बड़ी संख्या में किसानों को नुकसान हुआ। इसके बाद कृषि मंत्री के कड़े रुख पर बीजों के सैंपल लिए गए।
मध्य प्रदेश में इन सैंपल की रिपोर्ट आई है तो उसमें लगभग 10 प्रतिशत सैंपल अमानक पाए गए हैं। हालांकि, यह स्थिति मध्य प्रदेश में पिछले पांच वर्ष यानी वित्तीय वर्ष 2020-21 से है। इनके आकलन से सामने आया है कि बीज के सबसे अधिक सैंपल मध्य प्रदेश में फेल हो रहे हैं। केंद्रीय मंत्री के सख्त संदेश का असर यह रहा है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में अभी तक अमानक बीच के मामले में 11 लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई, जो पिछले वर्ष में एक भी नहीं थी।
वहीं, देश में बीज के सैंपल फेल होने का औसत तीन से चार प्रतिशत है। उत्तर प्रदेश की बात करें तो वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच दो प्रतिशत या इससे कम सैंपल ही फेल हुए हैं। उत्तराखंड में इस अवधि में 2.6 प्रतिशत और गुजरात में तीन प्रतिशत से कम सैंपल अमानक मिले। कार्रवाई की स्थिति यह है कि अमानक बीज की आपूर्ति करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई के नाम पर सिर्फ चेतावनी या बिक्री पर प्रतिबंध तक ही सीमित रहती है।
सीड्स एक्ट लेकर आ रहे हैं
हम नया सीड़्स एक्ट लेकर आ रहे हैं, जिसमें अमानक या नकली बीज मिलने पर कठोर कार्रवाई का प्रविधान किया जाएगा। अभी प्रविधान उतने कड़े नहीं होने के कारण कड़ी कार्रवाई नहीं हो पाती। – शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि मंत्री।

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