मॉस्को
रूस में एक बड़ा विमान हादसा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक एक यात्री विमान चीन की सीमा के पास लापता हो गया था। विमान का संपर्क एयर ट्रैफिक कंट्रोल से टूट गया था। An-24 नाम के इस यात्री विमान में 49 लोग सवार थे और ताजा रिपोर्ट से पता चला है कि सभी लोगों की मौत हो गई है। लापता विमान क्रैश हो गया था और अब उसका मलबा मिल गया है। रूस की सरकारी न्यूज एजेंसी TASS की रिपोर्ट में पहले कहा गया था कि विमान ने टिंडा (Tynda) के लिए उड़ान भरी थी लेकिन गंतव्य के नजदीक पहुंचते ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल से उसका उसका संपर्क टूट गया। बताया गया था कि चीन की सीमा के पास ये विमान लापता हो गया है।
TASS की रिपोर्ट के मुताबिक यात्री विमान, अंगारा एयरलाइंस का था और अंतिम बार जब उससे संपर्क हुआ था, वह टिंडा एयरपोर्ट से कुछ किलोमीटर की दूरी पर था। इसके बाद से उसका कोई पता नहीं चल पाया है। यह इलाका चीन की सीमा के काफी पास स्थिति है और इस क्षेत्र में करीब करीब हमेशा मौसम काफी खराब रहता है, जिससे विमानों के लिए उड़ान भरना काफी चुनौतीपूर्ण रहता है।
AN-24 का पूरा नाम Antonov-24 है, जो एक सोवियत निर्मित मध्यम दूरी का डबल इंजन टर्बोप्रॉप यात्री विमान है. इसे मुख्य रूप से कम दूरी की उड़ानों के लिए बनाया गया है और क्षेत्रीय उड़ानों के लिए इसका इस्तेमाल होता है. ये पहली बार 1959 में उड़ा था और इसे रूसी, पूर्वी यूरोप और एशिया के कठिन इलाकों में उड़ान भरने के लिए डिज़ाइन किया गया था. ये विमान लगभग 1,500 से 2,000 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है, जो इसे क्षेत्रीय उड़ानों के लिए परफेक्ट बनाता है. इसकी खासियत ये है कि ये कम दूरी के रनवे से टेकऑफ और लैंडिंग कर सकता है, जो इसे दूर-दराज और पहाड़ी इलाकों के लिए उपयुक्त बनाता है. इसके मजबूत और भरोसेमंद डिजाइन की वजह से इसे कार्गो विमान और सैन्य परिवहन में भी इस्तेमाल किया जाता है.
रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS और SHOT न्यूज आउटलेट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यात्री विमान के लापता होने की रिपोर्ट आने के साथ ही स्थानीय प्रशासन और एविएशन अथॉरिटी ने तत्काल सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया था। बचाव दलों को जंगलों और पहाड़ी इलाकों की ओर रवाना किया गया था। आशंका जताई जा रही है कि विमान की क्रैश लैंडिंग हो सकती है। जिस क्षेत्र में विमान लापता हुआ था वो अमूर क्षेत्र मौसम के लिहाज से काफी मुश्किल क्षेत्र है। यहां काफी ज्यादा ठंड होती है और पहाड़ी इलाका है। यहां घने जंगल, ऊबड़-खाबड़ इलाके हैं। इसके अलावा मौसम में अचानक परिवर्तन आता रहता है। इसलिए पायलट्स के लिए इस क्षेत्र से विमानों को उड़ाना काफी मुश्किल होता है।

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