पलक्कड़
यमन में मौत की सजा का सामना कर रहीं भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को बचाने की कोशिशें जारी हैं। कहा जा रहा है कि अगर पीड़ित का परिवार ब्लड मनी को स्वीकार कर लेता है, तो उनकी जान बच सकती है। हालांकि, ताजा रिपोर्ट्स से संकेत मिल रहे हैं कि पीड़ित परिवार ने धनराशि स्वीकार करने से मना कर दिया है। फिलहाल, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। निमिषा साल 2017 में यमन के नागरिक तलाल अब्दो महदी की हत्या की दोषी पाई गईं थीं।
यमन की कानूनी व्यवस्था के तहत अगर पीड़ित परिवार ब्लड मनी स्वीकार करने के लिए तैयार हो जाता है, तो निमिषा को क्षमादान मिल सकता है। ब्लड मनी एक तरह का आर्थिक मुआवजा है, जो दोषी की तरफ से पीड़ित परिवार को दिए जाने की पेशकश की जाती है। टेलीग्राफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, निमिषा प्रिया के मामले में 8 करोड़ रुपये की पेशकश की गई है।
खबर है कि Save Nimisha Priya International Action Council ने पूरी धनराशि के साथ तलाल के परिवार को शिक्षा, मेडिकल समेत कई अन्य सहयोग देने का भी वादा किया है। लेकिन कहा जा रहा है कि पीड़ित के परिवार ने सभी पेशकश ठुकरा दी हैं। टेलीग्राफ से बातचीत में काउंसिल की उपाध्यक्ष दीपा जोसेफ ने कहा, 'सारे प्रयास किए जा रहे हैं। हम मानवीय रूप से हर मदद पेश कर रहे हैं, लेकिन परिवार ने अब तक कुछ भी स्वीकार नहीं किया है। हम गुरुवार तक सना से कुछ अच्छी खबर का इंतजार कर रहे हैं।'
और भी हैं परेशानियां
कहा जा रहा है कि यमन में जारी संघर्ष ने निमिषा प्रिया मामले में मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। सना और मुल्क के अधिकांश हिस्से पर हूती विद्रोहियों का नियंत्रण है, जिसके चलते भारतीय अधिकारियों के प्रभाव को कम कर दिया है। जोसेफ बताती हैं, 'प्रेमा कुमारी (निमिषा प्रिया की मां) बीते अप्रैल से यमन में हैं। उन्हें किसी चमत्कार की उम्मीद है। प्रिया के पति और 12 साल की बेटी इडुक्की में हैं।'
केरल के पलक्कड़ जिले के कोलेनगोड़े की प्रिया को जुलाई 2017 में यमन के एक व्यक्ति की हत्या का दोषी ठहराया गया था। वह व्यक्ति प्रिया का बिजनेस पार्टनर था। यमन की अदालत ने 2020 में उसे मौत की सजा सुनाई थी और देश की सर्वोच्च न्यायिक परिषद ने नवंबर 2023 में उसकी अपील खारिज कर दी थी। निमिषा यमन की राजधानी सना में जेल में बंद है। सना में इस वक्त ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का नियंत्रण है।
पीटीआई भाषा के अनुसार, प्रिया की मां प्रेमकुमारी अपनी बेटी की रिहाई सुनिश्चित कराने के प्रयासों के तहत पिछले वर्ष यमन गई थीं। बताया जाता है कि भारतीय पक्ष ने प्रिया की रिहाई दियात या ब्लड मनी देकर सुनिश्चित करने के विकल्प पर भी विचार किया था लेकिन इसमें भी कुछ बाधा आई।

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