बारामुला
अमरनाथ यात्रा के कुछ ही दिन शेष हैं। यात्रा में कहीं कोई दिक्कत न हो इसका पूरा ख्याल रखा जा रहा है। तैयारियां अंतिम दौर में है और संवेदनशील इलाकों में सेना ने मोर्चा संभाल लिया है। सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस समेत अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने सुरक्षित व शांतिपूर्ण तीर्थयात्रा सुनिश्चित कराने के लिए कई संयुक्त अभियान शुरू किए हैं। गौरतलब है कि श्री अमरनाथ जी यात्रा तीन जुलाई से शुरू होने वाली है जो नौ अगस्त को संपन्न होगी। बता दें कि श्री अमरनाथ जी की वार्षिक यात्रा हमेशा से आतंकवादियों के निशाने पर रही है।
सुरक्षाबलों ने संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी है। अतिरिक्त चेक पॉइंट बनाए गए हैं। यात्रा के बेस कैंपों की ओर जाने वाले मार्गों पर इलाके का सेनिटाइजेशन अभियान चलाया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यात्रा के मार्ग पूरी तरह से आतंकवादियों से मुक्त हैं। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, सेना के पैरा स्पेशल फोर्सेज सहित विशिष्ट इकाइयों को तैनात किया गया है। दक्षिण कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में कई सर्च एंड डोमिनेशन ऑपरेशन (साडो) चलाए जा रहे हैं। इसके साथ ही, मध्य और उत्तरी कश्मीर के ऊपरी इलाकों में भी लगातार आतंकरोधी अभियान चल रहे हैं, जिनमें सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि ये अभियान समन्वित सुरक्षा रणनीति का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य किसी भी खतरे को रोकना और तीर्थयात्रियों तथा स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
पहले हो चुके हैं आतंकी हमले
इससे पहले अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमलों के कारण सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान रखा जा रहा है। साल 2000 में नुनवन में हुए आतंकी हमले में दो दर्जन अमरनाथ तीर्थयात्रियों सहित 32 लोग मारे गए थे। इसके बाद 2001 में शेषनाग में आतंकी हमले में 13 लोग मारे गए और 2002 में चंदनबाड़ी कैंप पर आतंकी हमला हुआ जिसमे 11 अमरनाथ यात्री मारे गए थे। इसी तरह 2017 में कुलगाम जिले में अमरनाथ यात्रा बस पर हुए हमले में आठ तीर्थयात्री मारे गए थे।

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