नई दिल्ली
सिंगापुर की सरकारी निवेश कंपनी टेमासेक (Temasek) कई साल से चीन के सबसे बड़ी संस्थागत निवेशकों में से एक है। लेकिन अब उसने चीन में अपना निवेश कम करना शुरू कर दिया है। करीब एक दशक में पहली बार कंपनी के पोर्टफोलियो में अमेरिका चीन से आगे निकल गया है। टेमासेक अमेरिका के साथ-साथ भारत पर भी बड़ा दांव खेल रही है। कंपनी का कहना है कि चीन के कैपिटल मार्केट्स में सुस्ती से देश में उसकी एसेट्स की वैल्यू में गिरावट आई है। लेकिन दूसरे बाजारों से उसे अच्छा रिटर्न मिल रहा है। इससे कंपनी के पोर्टफोलियो की नेट वैल्यू 389 अरब डॉलर पहुंच गई है जो पिछले फाइनेंशियल ईयर में 382 अरब डॉलर थी।
टेमासेक लंबे समय से चीन के सबसे बड़े संस्थागत निवेशकों में शामिल रहा है। 2020 में कंपनी के पोर्टफोलियो में चीन की हिस्सेदारी 29 फीसदी थी। लेकिन चार साल बाद यह घटकर 19 फीसदी रह गई है। मार्च में कंपनी के पोर्टफोलियो में अमेरिका की हिस्सेदारी 22 फीसदी हो गई है। सिंगापुर 27 फीसदी के साथ टेमासेक के पोर्टफोलियो में सबसे ऊपर है। कंपनी भारत में इनवेस्टमेंट तेजी से बढ़ा रही है। अभी उसके पोर्टफोलियो में भारत की हिस्सेदारी सात फीसदी है। करीब एक दशक में यह पहला मौका है जब कंपनी के पोर्टफोलियो में अमेरिका की हिस्सेदारी चीन से अधिक हुई है।
चीन की स्थिति
पिछले साल चीन के शेयर मार्केट का प्रदर्शन काफी खराब रहा था। यह दुनिया में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले शेयर बाजारों में शामिल था। देश का रियल एस्टेट सेक्टर गहरे संकट में है और कंज्यूमर स्पेंडिंग सुस्त पड़ी है। लोग पैसे खर्च करने के बजाय बचत में लगे हैं। इसकी वजह यह है कि वे इकॉनमी को लेकर निश्चिंत नहीं हैं। रियल एस्टेट संकट के कारण पूरी इकॉनमी के डूबने का खतरा पैदा हो गया है। देश की जीडीपी में इस सेक्टर की करीब 30 फीसदी हिस्सेदारी है। टेमासेक के अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका कंपनी का सबसे बड़ा डेस्टिनेशन बना रहेगा क्योंकि चीन को लेकर संदेह बना हुआ है। अमेरिका और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं।

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