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नई दिल्ली
दिल्ली में यमुना किनारे की तस्वीर बदलने की तैयारी है. सरकार अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट की तर्ज पर पल्ला से कालिंदी कुंज तक नदी के किनारे विकसित करना चाहती है. यहां साइकिल ट्रैक, पैदल चलने के रास्ते, खेल के मैदान और मनोरंजन की जगहें बनाने की योजना है. परियोजना को दो चरणों में पूरा करने की तैयारी है. जल मंत्री प्रवेश वर्मा का दावा है कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में ही लोगों को इस योजना की झलक दिखने लगेगी।
इस योजना के लिए साबरमती रिवरफ्रंट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) से जुड़ी फाइल आगे बढ़ाई गई है. परियोजना के लिए सलाहकार नियुक्त किए जा रहे हैं, जो साबरमती में अपनाए गए मॉडल का अध्ययन कर दिल्ली की जरूरतों के हिसाब से विकास की योजना बनाने में मदद करेंगे. सरकार का मकसद यमुना के किनारों को साफ-सुथरा, हरा-भरा बनाना है, ताकि लोग वहां सुबह की सैर, योग और साइकिलिंग जैसी गतिविधियां कर सकें।
दो चरणों में विकसित होगा यमुना रिवरफ्रंट
यमुना रिवरफ्रंट को वजीराबाद बैराज के आधार पर दो हिस्सों में विकसित करने की योजना है. पहले चरण में पल्ला से वजीराबाद तक काम होगा. दूसरे चरण में वजीराबाद से कालिंदी कुंज के पास ओखला बैराज तक नदी किनारे का विकास किया जाएगा. सरकार की प्राथमिकता पहले चरण को पूरा करने की है. इसके जरिए रिवरफ्रंट का शुरुआती मॉडल तैयार किया जाएगा, जिसके बाद अगले हिस्से पर काम बढ़ाने की योजना है।
प्रस्तावित योजना में नदी किनारे पैदल चलने के रास्ते, साइकिल ट्रैक, खेल के मैदान और खुले सार्वजनिक स्थान शामिल हैं. इन सुविधाओं का मकसद लोगों को घूमने-फिरने और समय बिताने के लिए बेहतर जगह देना है. हालांकि, इन सुविधाओं का अंतिम स्वरूप परियोजना की विस्तृत योजना के बाद ही साफ होगा।
साबरमती मॉडल से सीखकर बनेगी योजना
इस परियोजना की तैयारी के लिए प्रवेश वर्मा ने दिल्ली जल बोर्ड और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों के साथ साबरमती रिवरफ्रंट का दौरा किया था. वहां नदी के किनारे बनी सुविधाओं और उनके प्रबंधन को समझा गया. सरकार इन व्यवस्थाओं से सीख लेकर उन्हें दिल्ली की जरूरतों के अनुसार अपनाना चाहती है।
हालांकि, यमुना के किनारे विकास करना साबरमती जैसा मॉडल बनाने भर का काम नहीं है. इसके लिए नदी के बहाव, बाढ़ के खतरे, प्रदूषण और आसपास के शहरी इलाकों को ध्यान में रखना होगा. यमुना की सफाई भी इस योजना का अहम हिस्सा है, क्योंकि नदी में सीवेज पहुंचने की समस्या लंबे समय से बनी हुई है।
यमुना की सफाई के लिए सरकार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रही है. प्रवेश वर्मा के मुताबिक, दिल्ली में मौजूद 37 STP में से 28 को पिछले 18 महीनों में अपग्रेड किया गया है. इसके अलावा, रोजाना 250 मिलियन गैलन सीवेज के उपचार की क्षमता जोड़ने के लिए नए प्लांट बनाए जा रहे हैं. सरकार का लक्ष्य दिल्ली में सीवेज का पूरा उपचार करना है, ताकि बिना साफ किया गया गंदा पानी यमुना में जाने से रोका जा सके. मंत्री ने दावा किया है कि करीब ढाई साल में यमुना की सफाई का असर दिखाई देने लगेगा. हालांकि, इसके लिए प्लांटों का सही तरीके से चलना, सीवेज को उन तक पहुंचाने की व्यवस्था और नालों से होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाना भी जरूरी होगा।
दिल्ली में 52 किलोमीटर तक बहती है यमुना
यमुना दिल्ली में करीब 52 किलोमीटर तक बहती है. वजीराबाद से ओखला बैराज के बीच लगभग 22 किलोमीटर का हिस्सा प्रदूषण और सफाई के लिहाज से खास महत्व रखता है. सरकार नदी किनारे के विकास के साथ इसकी सफाई पर भी काम करने की योजना बना रही है।
अब इस परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सलाहकारों की नियुक्ति, योजना तैयार करने, जरूरी मंजूरियां लेने और निर्माण कार्य को कितनी तेजी से आगे बढ़ाया जाता है. रिवरफ्रंट बनने से नदी किनारे लोगों के लिए नई जगहें तैयार हो सकती हैं, लेकिन यमुना को साफ बनाने के लिए सीवेज और दूसरे प्रदूषण पर प्रभावी रोक लगाना भी उतना ही जरूरी होगा।

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