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नई दिल्ली
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र की प्रथम समिति की बैठक के दौरान पाकिस्तान को बेनकाब करते हुए भारत ने करारा जवाब दिया है। पड़ोसी देश के द्वारा फैलाए जाने वाले प्रोपेगैंडा को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। भारत के युवा राजनयिक और प्रथम सचिव अनमोल शेर सिंह बेदी ने जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए आतंकवाद, परमाणु और क्षेत्रीय अस्थिरता के मुद्दों पर पाकिस्तान को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी तरह के परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा और सीमा पार से होने वाले आतंकी हमलों के खिलाफ अपनी रक्षा करने का हमारा अधिकार पूरी तरह अक्षुण्ण है।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए बेदी ने मई में भारत द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई का बचाव किया। भारत ने कहा कि पहलगाम में हुए गंभीर उकसावे के बाद भारत ने केवल अपनी आत्मरक्षा में कदम उठाया था। भारत की यह कार्रवाई नपी-तुली, टारगेटेड और स्थिति को आगे न बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। भारत ने साफ कर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ अपनी संप्रभुता की रक्षा करते समय परमाणु खतरे का डर दिखाकर भारत को रोका नहीं जा सकता।
सिंधु जल संधि और एक्यू खान नेटवर्क का भी जिक्र
बेदी ने अपने संबोधन में दो अन्य बड़े और संवेदनशील मुद्दों का भी जिक्र किया। 1960 में हुई सिंधु जल संधि पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह समझौता सद्भाव और आपसी विश्वास पर आधारित था। कोई भी देश एक तरफ तो इस विश्वास को तोड़े और दूसरी तरफ इस संधि से मिलने वाले विशेषाधिकारों का लाभ उठाना चाहे तो यह अब संभव नहीं है।
पाकिस्तान के चर्चित एक्यू खान नेटवर्क (AQ Khan Network) के इतिहास का हवाला देते हुए भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1540 का जिक्र किया। भारत ने दुनिया को आगाह किया कि वे उन्नत सैन्य तकनीक और परमाणु हस्तांतरण को लेकर उच्चतम स्तर की सतर्कता बरतें। बेदी ने कहा, "अगर कोई देश आतंकवाद की मदद से हिंसा फैलाता है तो इससे उस देश की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। परमाणु हथियारों को कूटनीति के रोजमर्रा के औजार की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।" उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बार-बार पहले उकसावे की कार्रवाई करता है, फिर अपनी संलिप्तता से इनकार करता है और भारत के जवाब देने के बाद 'संयम' की अपील करने लगता है।
इस दौरान उन्होंने भारत के तीन मुख्य सिद्धांतों का जिक्र किया।
मुंहतोड़ जवाब: भारत पर होने वाले किसी भी आतंकी हमले का करारा और माकूल जवाब दिया जाएगा।
जीरो टॉलरेंस: भारत किसी भी तरह की परमाणु धमकी या ब्लैकमेल के सामने नहीं झुकेगा।
समान जवाबदेही: आतंकवाद को पनाह देने वालों और इसके मुख्य साजिशकर्ताओं के बीच भारत कोई अंतर नहीं करेगा।
जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में भारत ने एक बार फिर दोहराया कि यह क्षेत्र भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है और अवैध रूप से कब्जाए गए भारतीय क्षेत्रों को पाकिस्तान को खाली करना ही होगा। अंत में बेदी ने कहा, "भारत हमेशा शांति का समर्थक रहा है और रहेगा। लेकिन अगर गैर-जिम्मेदाराना हरकतों पर जवाबदेही तय नहीं होगी तो शांति केवल दो संकटों के बीच का एक छोटा सा ठहराव बनकर रह जाएगी।"

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