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लखनऊ
दिव्या मित्तल ने राजनीति में उतरने का ऐलान किया है। दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव पद से इस्तीफा दिया था। बता दें कि, देश में ऐसे नेताओं की एक अच्छी-खासी लिस्ट है जो पहले भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी यानी IAS थे और बाद में राजनीति में कदम रखा। कुछ अधिकारियों को तो राजनीति में अच्छी-खासी सफलता भी मिली। आइए जानते हैं उनकी कहानी।
यशवंत सिन्हा
भारतीय प्रशासनिक सेवा से सफल राजनेता बनने की लिस्ट में सबसे पहला नाम यशवंत सिन्हा का आता है। यशवंत सिन्हा 1960 बैच के IAS अधिकारी रहे हैं। IAS बनने से पहले वे दो साल तक पटना विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के शिक्षक रहे। यशवंत सिन्हा 1984 तक कई विभागों में वरिष्ठ अधिकारी के रूप में काम किया। वहीं साल 1984 में उन्होंने नौकरी छोड़कर राजनीति का रुख किया। राजनीति उन्हें काफी रास आई। साल 1984 में वो जनता पार्टी में शामिल हो गए। 1988 में वे राज्यसभा सांसद बने। बता दें कि, जब चंद्रशेखर 1990 में प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने यशवंत सिन्हा को वित्त मंत्री बनाया था। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को यशवंत सिन्हा अपने गुरु मानते थे।
वहीं साल 1993 में वे भाजपा में आ गए। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए सरकार बनी तो उन्हें इसबार विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। 2018 में मतभेदों के कारण उन्होंने बीजेपी से किनारा कर लिया। फिलहाल यशवंत सिन्हा तृणमूल कांग्रेस में हैं
अजीत जोगी
एक ऐसा अधिकारी, जिन्होंने राजनीति में कदम रखा और मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे। 1968 के बैच के आईएएस अधिकारी अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बने। अजीत जोगी ने राजनीति में शामिल होने का फैसला किया तो वह भी जिला कलेक्टर थे। जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कहने के बाद वो कांग्रेस में शामिल हो गए।
अजीत जोगी, मध्यप्रदेश में अधिकारी थे। उस समय छत्तिसगढ़, एक राज्य नहीं बना था और वो मध्यप्रदेश का ही हिस्सा था। जानकारी के मुताबिक, मध्यप्रदेश में नौकरी के दौरान अजीत जोगी तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के करीब आ गए और उन्होंने ही अजीत जोगी को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से मिलवाया। राजीव गांधी के कहने वो अजीत जोगी राजनीति में आए और कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा भेजा। वहीं जब छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश से अलग हुआ तब अजीत जोगी राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने। साल 2016 में उन्होंने खुद की पार्टी भी बनाई। मई 2020 को उनका निधन हो गया।
अल्फोंज कन्नाथानम
केरल के कोट्टायम जिले के रहने वाले अल्फोंज कन्नाथानम, 1979 बैच के IAS अधिकारी हैं। 1990 के दशक में दिल्ली विकास प्राधिकरण DDA के कमिश्नर रहते हुए उन्हें काफी पहचा मिली थी। उन्होंने कई अवैध इमारतों को ध्वस्त करवा था। इसरे बाद उनको ‘डिमोलिशन मैन’ भी कहा जाता था। साल 2006 में आईएएस से रिटायरमेंट के बाद वो कोट्टायम में कंजिरप्पाली से विधायक बने। वहीं 2011 में बीजेपी में शामिल हो गए और छह साल बाद, राजस्थान से राज्यसभा सांसद बने। बाद में वो केंद्रीय मंत्री भी बने
आर के सिंह
कभी देश के सबसे कड़क IAS अधिकारी के रुप में चर्चित रहे राज कुमार सिंह यानी आरके सिंह, राजनीति में भी काफी सपल रहे। बता दें कि, आर के सिंह ने जिलाधिकारी रहते हुए भाजपा नेता एल.के. आडवाणी को गिरफफ्तार भी किया था। समस्तीपुर के जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने एल.के. आडवाणी को उनकी रथ यात्रा के दौरान गिरफ्तार किया था। आरके सिंह ने 1974 में एक भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी बने , वहीं 1975 में वो एक IAS अधिकारी बने। IAS अधिकारी के रूप में पटना के डीएम भी रहे
रिटायरमेंट के बाद उन्होंने साल 2013 में भाजपा का दामन थाम लिया और 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में सफलता भी हासिल की। बिहार के आरा से वो दो बार सांसद बन चुके हैं। सांसद बनने के बाद आरके सिंह, केंद्रीय मंत्री भी बने। वहींसाल 2024 के लोकसभा चुनाव उनके लिए अच्छा नहीं रहा और उन्हें इस चुनाव में हार मिली। फिलहाल उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से दूरी बना ली है।
IAS शाह फैसल
जम्मू-कश्मीर से आने वाले यूपीएससी टॉपर शाह फैसल ने भी नौकरी छोड़ राजनीति का रुख किया था। शाह फैसल ने 2010 में UPSC AIR-1 हासिल किया। IAS अफसर बनने के बाद उन्होंने कई अहम पदों पर जिम्मेदारी संभाली, लेकिन 2019 में अचानक इस्तीफे का ऐलान कर दिया। इसके लिए उन्होंने बकायदा ‘जम्मू और कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट’ नाम की पार्टी भी बना ली थी। उनकी पार्टी जेकेपीएम ने अगस्त 2020 को घोषणा की, कि फैसल अब पार्टी छोड़ चुके हैं।

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