Exposetodaynews:
नई दिल्ली
एशियन गेम्स में क्रिकेट के मुकाबले इस बार सिर्फ खिलाड़ियों के लिए ही नहीं, बल्कि जापान के लिए भी खास होने वाले हैं. भारत अपने गोल्ड मेडल के बचाव का अभियान 28 सितंबर को क्वार्टर फाइनल से शुरू करेगा. इसके दो दिन बाद ही भारत और पाकिस्तान के बीच ब्लॉकबस्टर मुकाबले की संभावना भी बन सकती है l
मुकाबले जापान के निस्शिन में बने कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क (Korogi Sports Park) में खेले जाएंगे. खास बात यह है कि इस क्रिकेट सुविधा को किसी पुराने क्रिकेट मैदान को थोड़ा बदलकर तैयार नहीं किया गया है, बल्कि तीन बेसबॉल ग्राउंड की जगह पूरी तरह नई सुविधा तैयार की गई है. यही वजह है कि आयोजकों को मैदान के आकार से लेकर पिच की तैयारी तक काफी आजादी मिली l
हांगझोउ से करीब 10 मीटर बड़ी बाउंड्री
TOI के अनुसार- निस्शिन की सबसे छोटी बाउंड्री 65 मीटर की होगी. यानी चार साल पहले हांगझोऊ एशियन गेम्स में जिस मैदान पर क्रिकेट खेला गया था, उसकी तुलना में यहां बाउंड्री करीब 10 मीटर लंबी है l
एशियन गेम्स में क्रिकेट के तकनीकी संचालन से जुड़े अधिकारी एडम बिर्स (Adam Birss) ने बताया कि इस बार मैदान को नए सिरे से बनाने का फायदा मिला. हांगझोऊ में पहले से मौजूद जगह और ढांचे की सीमाएं थीं, लेकिन निस्शिन में आयोजकों के पास ज्यादा स्पेस था l
पल्लेकेले के क्यूरेटर ने तैयार की पिच
एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) ने इसके लिए श्रीलंका क्रिकेट से मदद मांगी थी. श्रीलंका ने कैंडी के पल्लेकेले इंटरनेशनल स्टेडियम के क्यूरेटर असिथा विजयासिंघे (Asitha Wijayasinghe) को यहां पिच तैयार करने की जिम्मेदारी में लगाया. पल्लेकेले को आम तौर पर हाई-स्कोरिंग मैदान के तौर पर देखा जाता है. ऐसे में निस्शिन की पिच पर भी बल्लेबाजों के लिए अच्छे रन बनने की उम्मीद की जा रही है l
कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में सिर्फ पारंपरिक टर्फ पिच ही नहीं हैं. यहां चार टर्फ पिच के साथ एक हाइब्रिड पिच भी तैयार की गई है.इस पिच में प्राकृतिक मिट्टी के साथ सिंथेटिक फाइबर्स का इस्तेमाल किया गया है. इस तरह की तकनीक ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका में भी इस्तेमाल की जाती है l
एडम बिर्स के मुताबिक, इस तकनीक से पिच को ज्यादा तेज बनाया जा सकता है. साथ ही लगातार मुकाबले होने पर पिच के घिसने और खराब होने का असर भी कम रहता है l
यानी यहां की हाइब्रिड पिच सिर्फ एक तकनीकी प्रयोग नहीं है, बल्कि एशियन गेम्स जैसे बड़े टूर्नामेंट में लगातार मुकाबलों के बीच पिच को बेहतर स्थिति में रखने का एक तरीका भी है.पिच की एक और खासियत इसमें इस्तेमाल होने वाली मिट्टी है. इसके लिए स्थानीय मिट्टी (Local Clay) का इस्तेमाल किया गया है.बिर्स के मुताबिक, मिट्टी में मौजूद क्ले कंटेंट तेज गेंदबाजों को बाउंस देने में मदद करेगा. वहीं स्पिन गेंदबाजों को भी इससे गेंद पर ग्रिप मिलने की उम्मीद है l

More Stories
IND vs NZ 1st T20: क्राइस्टचर्च में आज भिड़ेंगे भारत और न्यूजीलैंड, जानें प्लेइंग-11
भारत-न्यूजीलैंड पहला T20: क्या इस बार 300 रन पार करेगी टीम इंडिया? जानें संभावित प्लेइंग-11
U19 Women’s T20 World Cup 2027: भारत उतरेगा खिताब बचाने, जानें पाकिस्तान किस ग्रुप में शामिल