नई दिल्ली
ऑनलाइन धोखाधड़ी पर लगाम लगाने और डिजिटल पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से दूरसंचार विभाग (DoT) ने मोबाइल नंबर वैलिडेशन (MNV) से जुड़ा एक नया मसौदा नियम तैयार किया है। प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, अब मोबाइल नंबर वेरिफिकेशन के लिए सभी संस्थाओं को DoT के प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करना होगा और हर वेरिफिकेशन पर शुल्क भी देना होगा।
डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन का यह प्रस्ताव कहता है कि बैंक, फिनटेक और अन्य डिजिटल सेवाएं अब यूजर के मोबाइल नंबर को वेरिफाई करने के लिए केवल DoT के प्लेटफॉर्म का उपयोग करेंगी। बैंकों को प्रति वेरिफिकेशन ₹1.50 और अन्य संस्थाओं को ₹3 खर्च करना होगा। फर्जी या संदिग्ध नंबर को 90 दिनों के लिए बंद भी किया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, देश के करोड़ों परिवारों के पास एक ही मोबाइल होता है, जिसका उपयोग पूरा परिवार करता है — पेंशन देखने से लेकर डिजिटल शिक्षा और बैंकिंग तक। ऐसे में अगर हर खाते के लिए अलग मोबाइल नंबर की अनिवार्यता होती है, तो ग्रामीण और निम्नवर्ग डिजिटल सेवाओं से कट जाएंगे।

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